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Showing posts from April, 2020

Corona virus covid19

✍🏻अंग्रेजी में एक कहावत है: Every cloud has a silver lining. यह कोरोना पर भी लागू होता है।  सोशल मीडिया में लोग तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं सड़कों पर नीलगाय और हिरणों के विचरण की।  यह भी कि प्रदुषण में भारी कमी आयी है।  लेकिन इसके दुसरे पक्ष के ऊपर विचार कीजिये।  अस्पतालों में OPD बंद है; इसके बावजूद इमरजेंसी में भीड़ नहीं है। तो बीमारियों में इतनी कमी कैसे आ गयी? माना, सड़कों पर गाड़ियां नहीं चल रही हैं; इसलिए सड़क दुर्घटना नहीं हो रही है।  परन्तु कोई हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज या हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं भी नहीं आ रही हैं। ऐसा कैसे हो गया की कहीं से कोई शिकायत नहीं आ रही है की किसी का इलाज नहीं हो रहा है? दिल्ली के निगमबोध घाट पर प्रतिदिन आने वाले शवों की संख्या में 25-30 प्रतिशत की कमी आयी है। दिल्ली छोड़िये साहब बनारस का हाल देखे हरिश्चन्द्र घाट पर औसतन प्रतिदिन 80 से 100 शव आते थे आज करोना के माहौल मे प्रतिदिन 20 या  25 डेड बॉडी आ रही हैं इसी तरह मणिकरणिका घाट पर भी यही हालात वहॉ के डोम राज परिवार भी आश्चर्य चकित होते हुए बताते है की ये सन्धि मौसम है (जाड़े ...

There is nothing

गॉड इज नॉट ग्रेट 21वीं सदी में दुनिया में जो पांच दस सबसे महान नास्तिक विचारक पैदा हुए हैं, उनमें से रिचर्ड डॉकिंस के बाद सबसे बड़ा नाम आता है, क्रिस्टोफर हीचैन का । उन्होंने 2007 में  "गॉड इज नॉट ग्रेट" नाम की किताब लिखी और उस किताब में उन्होंने  सैकड़ों सबूत दे कर यह साबित करने की प्रयास किया, कि पिछले 5000 साल में मानव जाति पर जितने भी महा भयंकर संकट आए हैं उस दौरान  दुनिया के किसी भी ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने मानव जाति की कोई मदद नहीं की। मानव जाति में जो मुश्किल से 5% बुद्धिमान लोग हैं जिन्होंने मानव जाति को हर संकट के समय कोई न कोई रास्ता ढूंढ कर दिया है । लेकिन धर्म के नाम पर जो लोग अपना पेट पालते हैं और अपने आप को धर्म का ठेकेदार और ईश्वर का  प्रतिनिधि समझते हैं उन लोगों ने मानव जाति के जो 95% लोग है, और जो जन्मजात बुद्धिहीन है, और जो किसी न किसी काल्पनिक सहारे के बगैर जी ही नहीं सकते, ऐसे लोगों को बार-बार धर्म ने अपने जाल में जकड़ कर रखा है। दुर्भाग्य से आज क्रिस्टोफर हीचैन हमारे बीच नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस ने फिर एक बार क्रिस्टोफर हीचैन को सह...